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भिवानी। किसी ने अपनी कड़ी मेहनत को, किसी ने जीवन में घटित हादसों के बावजूद न केवल खुद को काबिल बनाया बल्कि अब दूसरों के जीवन में नई उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं। ऐसे ही भिवानी के युवा सितारों के जीवन के संघर्ष की कहानी हम बयां कर रहे हैं, जो अब युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। गांव ढांगर की युवा बेटी 25 वर्षीय मोनिका शर्मा ने वर्ष 2012 में करंट लगने की दुर्घटना में अपना एक हाथ खो दिया था। लेकिन उसका हौसला पस्त नहीं हुआ। मोनिका ने अपनी कमजोरी को ताकत में बदला और शूटिंग में कॅरिअर को आगे बढ़ाया। अब मोनिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग में पदक बटोर रही हैं।
भिवानी। शहर का दायरा और आबादी बढ़ने के साथ ही जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के सीवरेज ट्रिटमेंट प्लांटों पर दूषित पानी की निकासी का दबाव बढ़ गया है। इतना ही नहीं औद्योगिक सेक्टर 21 और 26 के लिए 18 करोड़ रुपये से बने कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट भी पर्यावरण एनओसी नहीं मिलने के कारण करीब दो साल से खामोश पड़ा है। बिना ट्रिटमेंट के दूषित पानी भिवानी-घग्गर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है जिससे किसान सिंचाई से भी तौबा कर रहे हैं।
कम्पलीट,
डिस्काउंट चरखी दादरी। ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना आसान नहीं होता, लेकिन मजबूत इरादों, कड़ी मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर यह संभव है। गांव खेड़ी बूरा की प्रिया लाखवान हिमाचल प्रदेश में न्यायिक अधिकारी बनकर युवाओं के लिए मिसाल बनी हैं। वहीं गांव इमलोटा के पहलवान सुजीत कलकल ने अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर क्षेत्र का नाम रोशन किया। गांव बलाली की कुश्ती खिलाड़ी नेहा सांगवान एशिया चैंपियनशिप और वर्ल्ड रैंकिंग सीरीज में पदक जीतकर लगातार आगे बढ़ रही हैं। इनके साथ ही गांव घिकाड़ा के बॉक्सर नवीन झाझडिया ने विश्व मुक्केबाजी कप में कांस्य पदक जीतकर साबित किया कि सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। आज युवा दिवस पर जिले के ये युवा सबके लिए प्रेरणा हैं। इन सभी प्रतिभाओं का एक ही संदेश है कि लक्ष्य तय करें, तुलना से बचें और ईमानदारी से मेहनत करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी।
रिवॉर्ड्स वीडियो, बदायूं। सैदपुर के मोहल्ला महेश चौक के रहने वाले 92 साल के विद्यासागर रस्तोगी का सीना उनके दो बेटों की बेरुखी से पहले से ही छलनी था। उस सीने पर उन्होंने गोली मारकर जख्म को और गहरा करते हुए मोह-माया के बंधन से मुक्ति पा ली। रविवार को उनके शव के पोस्टमॉर्टम से पहले जिला अस्पताल में कराए गए एक्स-रे में 16 छर्रे मिले। इन छर्रों को बड़ी मुश्किल से निकाला जा सका। इसके बाद देर शाम कस्बे में उनके शव का अंतिम संस्कार किया गया।







